The Greatest Guide To आस्तिक

பகவான் டோர்ஜே ஷுக்டேன் அனைவரையும் ஆசீர்வதிப்பார், அனைவருக்கும் உதவி புரிவார். மேலும் அனைத்து நிலையிலும் பின்னணிச்சூழலிலும் உள்ள அனைவருக்கும் துணை புரிவார்.

सारांश में इस श्रृष्टि के दो मूल इकायिओं भौतिक पदार्थ और आत्मा की उत्पत्ति भगवान श्री कृष्ण की दो मूल शक्तियों माया और ब्रम्ह के विस्तार से हुई

As our lives turn out to be richer and fuller with Dorje Shugden’s observe, our internal selves attain calmness and comfort, free of charge from anger and jealousy.

श्लोक #१७-१८ में अर्जुन ने श्री कृष्ण से अनुरोध किया कि श्री कृष्ण तों अनंत है और उनकी महिमा और उनकी शक्ति को समझ पाना मनुष्यों के वश में नहीं

इस प्रकार इस श्लोक में भगवान श्री कृष्ण ने मनुष्यों के लिए वह मार्ग बताया जिससे श्री मोक्ष और श्री कृष्ण के लोक की प्राप्ति निश्चित है

भगवान् दोर्जी शुगदेन को माँस, रक्त या हिंसा से प्राप्त सामग्री का अर्पण ना करें। इसके बजय पर दही, दूध, चाय, पानी, पुष्प, सुगन्धित धूप और दीये आदि उन्हें अर्पित कर सकते हैं। दोर्जी शुगदेन एक देव अवातार, और भगवान् को आपसे हिंसा या किसी की मृत्यु की अपेक्षा नहीं होती, उन्हें आपसे पशु या पशु वध नहीं चाहिए।

ध्यान योग वह तकनीक है जिसके द्वारा सतत चिंतनशील मस्तिष्क को शांत किया जाता है ध्यान के द्वारा हमारी चेतना में अनवरत चलने वाले विचारों के महा-समुद्र को शांत किया जा सकता है शांत मस्तिष्क के माध्यम से ध्यान साधक साक्षी भाव में आ समस्त ब्रह्माण्ड get more info के रचयिता के इस निरंतर चलायमान अंतहीन नाटक को दृष्टा भाव से देख आस्चर्य चकित हो सकता है

अर्जुन की भक्ति से प्रसन्न होकर श्री कृष्ण ने अगले ८ श्लोकों में अर्जुन को श्रृष्टि निर्माण और अपने दिव्य शक्तियों का रहस्य बताया और अर्जुन को यह सलाह दी कि वह इसे ध्यानपूर्वक सुने और ह्रदय से धारण करे

There are actually numerous religions on the planet, with unique Gods and Goddesses so there should be one which is suitable about God as not all of these may very well be right.

This god provides a previous, present, and long term. This god decides to perform some points and decides never to do Many others. This god does a neat pressured point of view trick While using the Sunshine plus the moon, but opts not to come back down out of the clouds and say, “Hey everybody!” What a cruel and Silly staying. Atheists are right for being indignant.

We Tried using our greatest to current the which means of every Shloka in merely method. But it is very probable we lacked a little something or not able to demonstrate certain reality Obviously.

རྒྱལ་པོ་ཆེན་པོ་ཤེས་རབ་ཀྱི་ལྷ་རྡོ་རྗེ་ཤུགས་ལྡན། ང་ཚོའི་དངོས་ཡོད་ཀྱི་གནས་སྟངས་མཁྱེན་ནས། ཕ་མས་བུ་ཕྲུག་ལ་བརྩེ་བས་སྐྱོང་བ་བཞིན། ང་ཚོ་ལའང་ཁྱེད་ཀྱི་ཐུགས་རྗེ་གནང་རོགས་གནང་།

अजोऽपि सन्नव्ययात्मा भूतानामीश्वरोऽपि सन्‌ ।

देवता और ऋषि अधिक से अधिक श्री कृष्ण के एक या दूसरे स्वरूप को ही जानते हैं

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